विनाशकाले विपरीत बुद्धी

विनाशकाले विपरीत बुद्धी


आलेख :-राजेंद्र गोदारा  
कैसे खुद की पार्टी की एक अच्छी भली चलती सरकार को खुद पार्टी द्वारा पूरी तरह खत्म किया जा सकता है 
पंजाब की केप्टननित कांग्रेस सरकार इसका एक संजिदा उदाहरण है 
सिर्फ 03 महिनें पहले तक एक सरकार जो बेहद लोकप्रिय थी पार्टी संगठन में भी कोई मतभेद या मनभेद नहीं था संगठन और सरकार दोनों में कोई मनमुटाव नहीं था दोनों मिलकर सरकार और संगठन के साम्जस्य का एक बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहे थे एक साल बाद विधानसभा चुनाव होनें वाले थे और खुद जनता कह रही थी केप्टन सरकार दोबारा आयेगी
विपक्ष बेदम था बादल परिवार अपने राजनितिक वजूद को बचाये रखने की कौशिश कर रहा था भाजपा या मोदी जी किसान आंदोलन के कारण मान बैठे थे कि कम से कम पंजाब में तो भाजपा के लिए कुछ नहीं रखा 
अचानक कुछ महिनें पहले राहुल गांधी की ट्रेक्टर रैली होती है रैली से पहले पंजाब कांग्रेस के प्रभावी महासचिव हरीश रावत पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिद्धू जो की पहले केप्टन सरकार में मंत्री थे से मिलते है और रैली में भाग लेने के लिए मनाते है ट्रेक्टर रैली के समापन पर हुई जनसभा में वे कांग्रेस की ही सरकार और केप्टन के खिलाफ जो बोल सकते है वो बोल कर भड़ास निकालते है मंच पर राहुल गांधी व हरीश रावत भी उस समय विराजमान है
उससे पहले की कथा -- पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अमृतसर के पूर्व सांसद अकाली दल के विरोध के नाम पर भाजपा छोड़ते है पहले आम आदमी पार्टी से तार जोड़ने की कौशिश करते है पर अपने लिए मुख्यमंत्री पद की मांग के साथ अब एकदम आये सदस्य को कौन पार्टी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाती है वो भी पार्टी में आने से पहले , केजरीवाल इन्कार कर देते है तब सिद्धु सीधे कांग्रेस हाईकमान से बात करते है और पता नहीं क्या बात करते है कि उन्हें पीसीसी अध्यक्ष केप्टन अमरेंद्र सिंह की खिलाफत के बावजूद पूरे ढोल नगाड़े के साथ कांग्रेस में शामिल करते है
उस सिद्धू को शामिल करते है जो 2014 के लोकसभा चुनाव में हर सभा में सोनिया गांधी राहुल गांधी व डाक्टर मनमोहन सिंह को अपशब्द कहता है राहुल गांधी को पप्पू कहता है मनमोहन सिंह को मौन मौहन सिंह कहता है विधानसभा चुनाव 2017 में वो केवल एक बार कहते है अमरेंद्र उनके भी केप्टन है भारी बहुमत से कांग्रेस सरकार बनाती है केप्टन सिद्धू को भी मंत्रीमंडल में शामिल करते है और शहरी विकास मंत्रालय देते है 2017 के बाद सिद्धू 2019 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ एक जनसभा करते है वो भी बठिंडा में जहां मंत्री हरसिमरत कौर बादल के खिलाफ गिद्दड़वाहा के विधायक पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अमरेंद्रसिंह राजा बड़िंग चुनाव लड़ रहे होते है उस सभा में
सिद्धु कहते है पंजाब में चुनाव नहीं 50-50 मैच हो रहा है केप्टन और बादल मिलकर लड़ रहे है केप्टन पटियाला से अपनी पत्नी परनीत कौर की जीत के लिए और सुखबीर बादल बठिंडा से अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल की जीत के लिए आपस में समझोते किये हुए है और जानबुझ कर एक दुसरे के खिलाफ कमजोर केंडिडेट उतारे है इस चुनाव में राजा बड़िंग हार जाते है पर सिद्धु के उस सार्वजनिक बयान पर कोई अनुशासनात्मक कारवाई नहीं होती है केप्टन भी उन्हें मंत्रीमंडल से ना हटाकर सिर्फ महकमा बदल देते है और उन्हें बिजली मंत्री बना दिया जाता है पर सिद्धू तो सदैव अपनी मनमानी करते है और बिजली मंत्रालय नहीं संभालते है इसके बाद सिद्धू दिल्ली जाते है राहुल गांधी से मिलते है और मंत्रीमंडल से अपना त्यागपत्र भी राहुल गांधी को ही सोंपतें है
इससे आगे की तूं दाश्तां मुझ से सुन -- समय चलता रहता है नवजोत सिद्धू नहीं बोलते तो उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू केप्टन व उनकी सरकार के खिलाफ बोलती है
3-4 महिने पहले नवजोत सिद्धू एक बार फिर सक्रिय होते है हरीश रावत तो उनसे मिलते ही रहते है वे दिल्ली जाकर राहुल गांधी व प्रियंका गांधी से मिलते है और समझिये ठहरे हुई झील के पानी में पत्थर मार आते है इस समय तक कांग्रेस सरकार पूरी तरह स्थिर थी सरकार व संगठन में अच्छा तालमेल था और विरोधी भी मान रहे थे केप्टन सरकार दोबारा जीत कर आयेगी
पर अब तो उसे सिद्धू नजर लग गई थी तीन सदस्यों की एक कमेटी जिसमें हरीश रावत भी शामिल थे और केप्टन की अग्नी परिक्षा शुरु हो गई सभी विधायकों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को दिल्ली बुलाया गया और एक एक से केप्टन सरकार के कामकाज के बारे में विस्तार से पूछा गया तब सिद्धू के साथ मात्र विधायक परगट सिंह थे कुल 22 मुद्दे निकाले गये और केप्टन से उस पर सफाई मांगीं गई केप्टन ने उन 22 मुद्दों पर अपनी सरकार सरकार द्वारा की गई कारवाई बताई व आगे सरकार द्वारा की जाने वाली सशक्त कारवाई के बारे में बताया
पर सरकार को तो सिद्धू की काली नजर लग चुकी थी अब पार्टी संगठन में भी आवाज उठने लगी की पार्टी प्रदेश अध्यक्ष बदला जाये सुनील जाखड़ 2019 के लोकसभा चुनाव में 13 में से 08 सीट जीतने के बावजूद जिम्मेदारी लेकर इस्तिफा दे चुके थे अब उसे स्वीकार करने की मांग उठने लगी और अखबार बाजी में कयास लगने लगे की सिद्धू अगले प्रदेश अध्यक्ष हो सकते है 
तब केप्टन ने कांग्रेस अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि अगर सिक्ख मुख्यमंत्री तो प्रदेश अध्यक्ष हिंदू या दलित हो तो पार्टी में संतुलन रहता है पर पार्टी हाईकमान तो लगता था सिद्धू को बनाने की ठान चुका था तब केप्टन को दिल्ली तलब किया गया और उन्हें एक तरह से सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष मानने का हुकुम सुना दिया
सिद्धू प्रदेश अध्यक्ष बन कर आये पर मुख्यमंत्री से मिलने नहीं गये उधर अफवाह उड़ी की केप्टन सिद्धू से उनके पिछले पार्टी विरोधी बयानों पर माफी मांगने के लिए अड़े है पर सिद्धू ने पार्टी पदाधिकारियों व विधायकों की बैठक प्रदेश कार्यालय में बुला ली केप्टन को नहीं बुलाया गया पर केप्टन दुनियादारी जानते है वो खुद चल कर पार्टी कार्यालय गये पर सिद्धू पार्टी मीटींग छोड़ कर चले गये तब हरीश रावत ने ने प्रियंका गांधी को फोन किया तब प्रियंका ने सिद्धू से बात की और तब सिद्धू खुद अपनी बुलाई पार्टी मीटींग में लौटे
पर अब बस कहां होने वाली थी सिद्धू ने चार सलाहकार रख लिये चारों कांग्रेस विरोधी विचारों वाले एक के जम्मू कश्मीर पर भारत के नाजायज कब्जे वाले बयान पर हरीश रावत तक को कहना पड़ा सिद्धू को पार्टी अध्यक्षी सोंपी है पूरी पार्टी नहीं सोंप दी पर सिद्धू कहां रुकने वाले थे उनके चार समर्थक मंत्री रंधावा बाजवा व चन्नी देहरादुन गये और मुख्यमंत्री बदलने का मांग पत्र हरीश रावत को सोंप आये
इधर सिद्धू ने व्यापार संघ की एक सभा में सीधे आलाकमान को चुनौती दे दी सिद्धू ने सभा में कहा कि अगर उन्हें उनके प्रदेश अध्यक्ष के संपूर्ण अधिकार नहीं दिये गये तो वे हाईकमान की इंट से इंट बजा देंगें ऐसा बयान किसी और कांग्रेस नेता ने दिया होता तो उस पर पार्टी का अनुशासन तोड़ने की कारवाई होती और हो सकता है तत्काल पार्टी से निकाल दिये जाते
पर सिद्धू पर तो मेहरबान है उन से लिखित सफाई तक ना मांगी गई और आज सिद्धू ने पार्टी विधायक दल की बैठक बुला ली और हाईकमान की तरफ से उसमें हरीश चौधरी व अजय माकन बतौर पर्यवेक्षक शामिल होंगें और विधायकों की राय जानकर हाईकमान को अपनी रिपोर्ट देंगें
इतनी अच्छी तरह चल रही सरकार को कैसे गिराया जा सकता है पंजाब इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है सिद्धू द्वारा बैठक बुलाने व आलाकमान द्वारा उसे मंजूर कर के अपने पर्यवेक्षक भेजने को खुद के दम पर सरकार बनाने और खुद के दम पर सरकार चलाने वाले राजीव गांधी के अभिन्न मित्र और 1965 युद्ध के जांबाज योद्धा केप्टन अमरेंद्र सिंह ने अपमानजनक माना और मीटींग से पहले ही अपना इस्तिफा राज्यपाल को सोंप दिया
अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक चल रही है 80 में से 78 विधायक इसमें शामिल है शायद मींटींग में अगला मुख्यमंत्री चुनने के लिए पार्टी आलाकमान को अधिकृत करेंगें जो हो सकता है नवजोत सिद्धू को अगला मुख्यमंत्री चुनें
एक व्यक्ति कितना कुछ समाप्त कर सकता है सिद्धू ने अति की और अति की और और अति की
और इसके परिणाम स्वरूप वे मुख्यमंत्री भी बन सकते है
सिद्धू ने जब भाजपा छोड़ी तब भाजपा के प्रवक्ता ने कहा था सिद्धू कभी पार्टीमेन नहीं बन सकते वे अकेले हो हल्ला करने वाले कॉमेडियन है जो कब किसी के खिलाफ क्या बोल बैठे खुद सिद्धू को पता नहीं और अगर सिद्धू जैसे व्यक्ति को पार्टी अध्यक्ष जैसा ओहदा कभी मिल जाये तो वह पूरी पार्टी को तहस नहस कर सकता है और उनके जैसे ही उनके चेलें तब भी कहेंगें
वाह छा गये गुरू
Rajender Godara
18 सितंबर 2021
साभार :-https://www.facebook.com/rajender.godara.925